राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सोलंग में पिछले कई वर्षों से अध्यापकों के अनेकों पद रिक्त.. छात्र और अभिभावक परेशान.. सरकारी स्कूलों को कैसे मिलेगा बढ़ावा



हिमाचल प्रदेश के "जुब्बल, नावर,कोटखाई विधानसभा" के दूरदराज व सीमांत क्षेत्र सोलंग के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सोलंग में पिछले कई वर्षों से अध्यापकों के अनेकों पद रिक्त हैं, जिस कारण इस क्षेत्र के बच्चों को पढ़ाई में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, हालात ये हो गए है कि स्कूल में अब ज्यादातर बच्चे गरीबी रेखा से नीचे के परिवारो से संबंधित ही रह गए है, जो परिवार आर्थिक रूप से कुछ हद तक सक्षम हैं वह अपने बच्चों को अन्य स्कूलों की ओर भेज रहे हैं। 
विद्यालय में 80 प्रतिशत बच्चे B.P.L(गरीबी रेखा से नीचे) श्रेणी के है, गौरतलब है कि यहां SMC और अभिभावकों ने अध्यापकों की नियुक्ति हेतु सरकार के विरुद्ध उच्च न्यायालय हिमाचल प्रदेश में याचिका दायर की है, और उच्च न्यायालय ने शिक्षा विभाग को फटकार लगाते हुए रिक्त पदों को शीघ्र अतिशीघ्र भरने के लिए कहा है। विधालय में वर्तमान में भी 20 पदों में से प्रधानाचार्य समेत 11 पद रिक्त पड़े हैं। विधालय में राजनीति शास्त्र के प्रवक्ता राजेंद्र सिंह पन्नाईक सन् 2013 से क्लेरिकल के तीन पदों का कार्यभार संभाले हुए हैं और साथ ही साथ प्रधानाचार्य का कार्यभार भी उन्हीं के पास है। एक व्यक्ति के लिए एक साथ पांच पदों पर कार्य करना वास्तव में कठिन कार्य है। उच्च न्यायालय के आदेश पर शिक्षा विभाग तीन बार प्रधानाचार्य और अध्यापकों को विधालय में प्रवेश के लिए आदेश कर चुका है लेकिन राजनीतिक सांठ गांठ के कारण अध्यापक अपनी एडजेस्टमेंट ऊपर ऊपर से ही करवा लेते हैं।
यहां की एस एम सी और स्थानीय लोगों ने रोष जताया है कि यदि सरकार ने यहां पर अध्यापकों की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से नहीं की तो स्थानीय जनता सरकार के विरुद्ध रोष प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतर जाएगी।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सोलंग में अध्यापक  की कमी से बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है। आज गरीब अभिभावकों को अपने बच्चों ‌की चिंता सता रही है कि मेरा बच्चा कैसे ‌पढेगा। एक समय ऐसा भी था जब एक ही स्कूल में एक ही सब्जेक्ट के दो दो अध्यापक होते थे। अभिभावकों ने सरकार को पता नहीं कितनी बार तो प्रस्ताव भेज दिए लेकिन सरकार भी इस दूर दराज की पंचायत के साथ अनदेखी कर रही है। आज अभिभावक रोष जता रहे है की ‌इस पंचायत के साथ कियु अनदेखी कर रहे है। जबकि यह शिमला जिले की आखरी पंचायत है। उत्तराखंड के साथ सटा हुआ गांव है।
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